गीता सार

जो मेरे भाग्य में नहीं है ,
वो दुनिया की कोई भी शक्ति ,
मुझे दे नहीं सकती और जो मेरे भाग्य में है ,
उसे दुनिया की कोई भी शक्ति छीन नहीं सकती |

ईश्वरीय शक्ति असम्भव को सम्भव बना सकती है

अत: कर्म ही “कामधेनु”
एवम् पार्थना ही “पारसमणि” है


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कुछ आंतरिक या बाह्य रिश्ते उस तरह के होते हे
जिस के कारन आपको सुकून और शांति मिलती हे 


वह रिश्ते आपकी कमियों को नहीं पर आपकी खूबियो को देखते हे
उन रिश्तों के कारन जीवन में गहरी समज आती हे ऐसे रिश्ते का भविष्य क्या हे?


सामने वाले आपके बारे में क्या सोचते हे?
और इन रिश्तों में जो  सूक्ष्म समस्याये आती हे उसकी वजह क्या हे?
इन सब का जवाब आप पा सकते हे 


उनके अलावा 
परिवार,सामजिक,व्यवसायिक,राजकीय रिश्तो में ऊलजी हुयी 
समस्या केसे दूर कर सकते हे उनका ऊतर भी पा सकते हे 


पूर्वीदीदी 
ध्यान की गहराई में जाकर आपको आपके प्रश्न के ऊतर सहज रूप से दे सकते हे 

दीदी ओशो की सन्यासिनी हे वह ओशो जेन टेरोकार्ड्स-टेलीपथी-ऐनरजी रीडिंग-व्यक्ति के आस-पास के वाईब्रेशन विविध पद्धति से आपकी विकट से विकट परीस्थिति को काबू में लाने का सफल प्रयास करती हे 
उनकी प्रेरणा उनकी माताश्री अनुमाँ हे 



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